मंगलवार, 1 मार्च 2011

मार्गदर्शक - लक्ष्य जो मैंने तय किए हैं

प्रतिभा विकास अभियान

शैक्षणिक , सांस्कृतिक , खेल , साहित्यिक , सामाजिक , राजनैतिक , कैरियर , व्यवसायिक व कला आदि क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास के दृष्टिगत प्रतिभा का समग्र विकास

इसके लिए सभी साथ मिलकर अपनी अपनी सामर्थ्य के अनुसार योगदान करें

योगदान शारीरिक , मानसिक व आर्थिक हो सकता है

जो अनुभव हमने प्राप्त किया है , उसे नई पीढी के साथ बांटा जाए

इसके लिए

जहां भी जब भी अवसर मिले , इस बारे में विचार किया जाए

हम सब क्या कर सकते हैं , इस बारे में आपस में चर्चा की जाए

सुझावों पर विचार विमर्श करते हुए उन्हें लागू करने हेतु कदम उठाए जेम

बाल प्रतिभोम व युवाओं को नक़ल जैसी कुप्रवृति की हानियां समझाई जाएं

धन का लालच देकर नहीं , अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में प्रगति करने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाए

आवश्यक सलाह व मार्गदर्शन दिया जाए

जहां हम पहुंचना चाहते थे पर किसी कारणवश नहीं पहुंच पाए, अपने अनुभवों के आधार पर नई पीढी को उनसे अवगत कराया जाए ताकि वे इसके प्रति सतर्क रहें और उन्हें लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिल सके

महिलओं को शिक्षित करने पर विशेष बल दिया जाए

प्रौढ़ शिक्षा में बढ़चढ़ कर योगदान किया जाए

स्वयं को दीनहीन समझाने की प्रवृति को दूर किया जाए

खेल प्रतिभोम का मार्गदर्शन किया जाए व यथासंभव सहायता की जाए खेल स्पर्द्धाएं आयोजित कराई जाएं

संस्कृतिक व साहित्यिक परिवेश में प्रतिभोम को प्रदर्शन का अवसर मिलाना चाहिए ; इसके लिए समग्र प्रयास किए जाएं

सामाजिक व राजनैतिक जागरूकता के लिए प्रतिभाओं को इस तरह जागरुक किया जाए कि सामाजिक व राजनैतिक प्रदूषण दूर किया जा सके


आर्थिक रूप से सुदृढ़ समाज प्रगति का सूचक मन जाता है ; इसके लिए कैरियर व व्यवसाय की दिशा में प्रतिभाओं का मार्गदर्शन किया जाए

किसी भी तरह की कला को प्रोत्साहित करने के लिए यथासंभव सहायता उपलब्ध करने हेतु योगदान किया जाए

संपर्क - सूत्र : ईश्वर भारद्वाज मो: 9355719445 ( हरियाणा ) , Email: bhardwajishwar001@gmail.com

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

we r legging behind

i was busy as my computer was facing technical problems and a new connection by bsnl is not cooperating. rather some problems have been added by the virus caused by the connection. i was also in fix as sometimes devnagri script enabled whereas on some occasions it is not available. i m also busy with my new born grandson "jayendu" at ahmedbad born on 2.2.11. also my daughter and her 3 yrs lod daughter "priyanshi" is here 4 some days. im returning 2 my hometown the day after tomorrow.then, i hope, i shall be able 2 write the blog rergularly.
ishwar bhardwaj (my other blog is "parat-dar-parat")

शुक्रवार, 14 मई 2010

शराब को महफिल की रानी समझने वालों की आजकल पौबारह हैं। वे दिन निकलते ही इस अंगूर की बेटी की शरण में पहुंच जाते हैं। वे कहते हैं कि चुनाव बार-बार हों तथा एक समय पर एक ही चुनाव होने चाहिएं। वे ये भी कहते हैं कि इन चुनावों को लड़ने के लिए हर पैसे वाले जन को अपना भाग्य आजमाना चाहिए। आखिर उनका पैसा फिर कब काम आएगा? ये भी तो दान पुन ही मानते हैं ये पियक्कड़ वोटर । चुनाव बार-बार हों और हर चुनाव में पैसे वाले जन ज्यादा से ज्यादा संख्या में खड़े हों, यही तो सपना है इन सुरा सुन्दरी के कद्रदानों को। इनको अपने ग्राम, अपने इलाके या अपने राज्य अथवा देश से कुछ लेना देना नहीं रहता। विकास के नाम पर ये बस सुरा की किस्म व मात्रा में सुधार पर ध्यान देते हैं। इनपर ये कहावत बिलकुल फिट बैठती है कि कोई मरे कोई जीए, सुथरा घोल बताशा पिए।
(मेरा अन्य ब्लॉग है: parat dar parat)

सोमवार, 26 अप्रैल 2010

स्वास्थ्य का क्या होगा?

भारतीय चिकित्सा परिषद् के अध्यक्ष के रिश्वत काण्ड में पकडे जाने से साफ हो गया है कि इस संस्था को ही चिकित्सा की आवश्यकता इतनी अधिक है कि इसके न होने से आने वाले दिनों में न जाने कितने डॉक्टर ऐसे हो जाएंगे जो बिना चिकित्सा की पढाई किए ही पैसे देकर चिकित्सक होने की डिग्री प्राप्त कर लेंगे। फिर मरीजों का क्या होगा, यह तो परमात्मा ही जाने। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जांच के लिए समिति तो गठित कर दी है, लेकिन परिणाम क्या होगा; अभी समय से पहले की बात है। सी.बी.आई की टीम के छापे के दौरान जो सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं, वो सबको चौंकाने वाले हैं। शाही ठाट बाठ की जीती जागती तस्वीर देखने को मिली केतन देसाई के आलीशान बंगले में। एक तरफ गरीब व होनहार छात्र अपने सीमित साधनों के कारण पढाई पूरी करने से भी रह जाते हैं वहीं दूसरी तरफ अरबों में खेलने वाले केतन देसाई सरीखे जन भी हैं जो देश के स्वास्थ्य से ही खिलवाड़ भी कर रहे हैं तथा अकूत धन भी कमा रहे हैं।
-ईश्वर भरद्वाज

रविवार, 25 अप्रैल 2010

सबसे बड़ा रुपैया

पैसा एक ऐसी चीज है जो मनुष्य को इंसान से हैवान तक बन देता है। यह मनुष्य को अहंकारी एवं बुद्धिहीन करने में देर नहीं लगाता है। यह अपनों को ही अपनों के विरुद्ध खड़ा कर देता है तथा सभी रिश्तों को तार-तार कर देता है। सभी प्रकार की मर्यादा को ताक पर रखवा देता है और आदमी को अपने तक ही सीमित बना देता है। अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड को ही लीजिए। आज इसमें जो जूतामपजार चला आ रहा है उसके पीछे पैसा ही तो है। कलतक जो साथ-साथ अकूत धन कमा रहे थे आज वही एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं क्योंकि कहीं न कहीं मिल-बाँट करने में चूक रह गयी होगी। पुराने हिसाब बराबर करने वाले भी आ डटे हैं मैदान में। इसका अंत क्या होगा कुछ निश्चित रूप से कह पाना मुश्किल है, किन्तु यह अंत भी पैसा ही करेगा.
-ईश्वर भरद्वाज

मंगलवार, 9 मार्च 2010

महिला आरक्षण बिल पास होने के रोड़े

आज राज्य सभा में महिला आरक्षण बिल पास हो गया है। बसपा, राजद, सपा आदि दलों के साथ ही ममता का हठीलापना फिर सामने आया और इन्होंने पहले की ही तरह बिल का विरोध किया । उनके अनुसार यह बिल सभी दलों के साथ अच्छी तरह सलाह-मशविरा किए बिना व मुस्लिम महिलओं की आरक्षण की स्थिति स्पष्ट किए बिना ही पेश किया गया है। लालू व सपा ने तो केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की भी बात कह दी है। इस तर्कहीन राजनीति के पीछे महिला विरोधी लोबी का हाथ होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। महिला की बढ़ती शक्ति को अपने लिए चुनौती व खतरा मानकर ये राजनेता ऐसी नौटंकी करते ही रहते हैं। कबतक ये महिला विरोधी मानसिकता के सहारे अपनी दुकानदारी चलातेरहेंगे,कहा नहीं जा सकता।
(मेरा अन्य ब्लॉग है: parat dar parat)

गुरुवार, 4 मार्च 2010

हर जगह जरूरत है सुधार की

मैं एक ग्रामीण क्षेत्र से सम्बन्ध रखता हूं जहां अधिकतर वयस्क अशिक्षित अथवा अल्प शिक्षित हैं। यह बात अलग है कि नव युवा पढाई के प्रति सजग हो रहे हैं और इस हेतु प्रयास भी कर रहे हैं। किन्तु उनमें ग्रामीण अल्हड़पन भरा पड़ा है। वे अपनी बोलचाल व आचार व्यवहार में परिष्कृत होने के कम ही प्रयास करते हैं। यदि उनको परिष्कृत करने के लिए कोई पहल होती है तो आसानी से उसके लिए कई ज्ञात-अज्ञात कारणों से तैयार नहीं होते। इनमें अपने अल्प ज्ञान को सम्पूर्ण व सही मानने की मानसिकता भी शामिल है। विशेषकर जब उनका कोई अपना यह शुरुआत करे। मैं कुछ ऐसा ही अनुभव कर रहा हूं क्योंकि मैंने अपने क्षेत्र में युवा वर्ग के लिए कुछ नवप्रयास करने की शुरुआत की है। कुछ को यह समझ नहीं आ रहा है और कुछ अपने ज्ञान के सामने इस प्रयास को कुछ खास नहीं मानने की मानसिकता से ग्रस्त हैं।यह उनके लिए अच्छा नहीं है। कई बार मैं अपने प्रयासों को गलत जगह की गयी शुरुआत भी सोचने को विवश होने लगता हूं लेकिन अगले ही पल मुझे अपनी इस कमजोरी पर तरस आने लगता है क्योंकि मैं औरों को जिस सबल मानसिकता सिखाने चला हूं वैसी मेरी अपनी तो पहले बने। यही विचार मुझे अपने प्रयास सतत रूप में जारी रखने को प्रेरित करता है।
(मेरा अन्य ब्लॉग है : parat dar parat)