शनिवार, 20 अगस्त 2011
they are what they don't seem
it has become a fashion among the politicians to give statements and comments on every issue whether they are concerned with it or not. they issue statements even if they have no knowledge of it or vice verse. it seems they have some kind of unknown fear from all and sundry. even they are afraid of their close ones. they are suspicious, they have fear. due to their dubious character and uncertain future, they are always suspicious and afraid.
बुधवार, 17 अगस्त 2011
the govt.,the congress versus anna hajare
i have come across many a news in which govt. of india as well as ruling congress party's spoke persons speaking in front of media keeping all the etiquetts away. even in the parliament the minister for parliamentary affairs tried his worst to block the smooth working of the parliament. the minister of hrd is badly known for his unwanted wording. a general secretary of the party is already known for his disputed language and issues where he has crossed all the boundaries of a democratic system. all htese are well versed in the field of law. many other spokepesons of this ruling party are foolowing the same path.anna hazare is working in the right direction foolowing the path adopted by gandhiji. one mr. tushar gandhi, a grandson of mahatma gandhi has also raised his word of disagreement with anna hajare, whom some persons has called as today's gandhi. everyone knows about the zigzag political career of him. he has nothing to do with gandhism. for some time he remains in the news only due to his comments on the things happening , out of which he choose only what he finds suitable. after this he again goes to a hide for a long period.
शुक्रवार, 22 जुलाई 2011
commenting people
now a days it has become a fashion to shot comments on various issues. this does not matter whether their statement was required or not. there are persons in every field of life. they have their comments on every issue are always ready. people may or may not like their comments,but they are always in a mood to be involved in every field . they may or may not have any knowledge of the issue but their comment is always there.
शुक्रवार, 10 जून 2011
भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी का खौफनाक चेहरा कितना बेखौफ हो गया.
भ्रष्टाचार में लिप्त होने व पैसे लेकर नौकरी दिलवाने का झांसा देकर लोगों को ठगने का काम हरियाणा में किस स्तर तक जा पहुंचा है यह करनाल जिले के कम्बोपुरा गाँव के पूर्व सरपंच कर्मसिंह की ह्त्या में हरियाणा के दो बड़े नेताओं के कथित रूप से शामिल होने से और पुख्ता हो गया है। मुख्यमंत्री के लाख दावों के बावजूद यह भ्रष्ट आचरण धड़ल्ले से चल रहा है। इसी सन्दर्भ में अपना नाम आने के परिणाम स्वरूप दबाव बढ़ने से हरियाणा के परिवहन मंत्री ओमप्रकाश जैन व मुख्य संसदीय सचिव जिलेराम शर्मा ने आखिरकार अपने इस्तीफे देने ही पड़े क्योंकि मुख्य मंत्री भूपेन्द्र सिंह हूड्डा ने अकेले में उनकी बात सुनने के अनुरोध को ठुकराकर सबके सामने ही अपनी बात रखने को कहा। उनकी इस सख्ती को भांपते हुए दोनों ने वहीं पर अपने अपने त्यागपत्र मुख्यमंत्री को सौंप दिए।जिलेराम का त्यागपत्र मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार कर लिया जबकि ओमप्रकाश जैन के त्यागपत्र को राज्यपाल के पास स्वीकृति हेतु भेज दिया। ओमप्रकाश जैन पानीपत देहात से निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए थे व हुड्डा सरकार में मंत्री का दर्जा पाने में कामयाब रहे जबकि जिले राम शर्मा हजकां के टिकट पर असंध से चुनाव जीते व बाद में पाला बदलकर हुड्डा के साथ जा मिले और मुख्य संसदीय सचिव के पद पर आसीन हो गए। मृतक के पुत्र राजिन्द्र के अनुसार जिले राम शर्मा ने उसे पुलिस में भर्ती कराने के लिए उसके पिता से 4.95 लाख रूपए लिए थे। इसी प्रकार ओमप्रकाश जैन पर उसने आरोप लगाया कि उनके एक रिश्तेदार से परिवहन विभाग में नौकरी लगवाने के लिए साढ़े चार लाख रूपए लिए तथा स्वयं उसे कंडक्टर की नौकरी दिलवाने के लिए साढ़े तीन लाख रूपए लिए थे। राजिन्द्र के अनुसार दोनों ने ही न तो नौकरी दिलवाई और न ही पैसे वापस किए। यदि यह सही है तो राजनीति में भ्रष्टाचार का ग्राफ इस स्तर पर पहुंचना भयंकर खतरे का संकेत है। अब किस पर विश्वास करेंगे लोग और किससे फरियाद करेंगे?अन्ना हजारे व बाबा रामदेव के आन्दोलन को कुचलने के पीछे की मनसा का इस प्रकार की घटनाओं से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है ।
गुरुवार, 26 मई 2011
स्वामी अग्निवेश का बडबोलापन
सन्यासी से आर्य समाज के प्रधान बनकर राजनीति में पैर रखने की कोशिश में स्वामी इन्द्रवेश व अग्निवेश हरियाणा में ऐसे युवा सन्यासियों के रूप में उभरे जो समाज को कुछ देने की आकांक्षा रखते थे। समय के साथ-साथ उनके सफर ने कई मोड़ लिए और स्वामी अग्निवेश बंधुआ मुक्ति आन्दोलन के अगुआ बनकर देश में कार्य करने लगे। कई बार नक्सलियों से सहानुभूति रखने के कारण उनको आलोचना झेलनी पडी। इसी तरह कई बार विवादित रहते हुए उनकी ताजा विवादित जबान तब हुई जब उन्होंने कश्मीर के नरमपंथी अलगाववादी नेता के साथ मुलाकात में अमरनाथ यात्रा को ढकोसला और धोखा आदि शब्दों का प्रयोग करके करोड़ों की आस्था को ठेस पहुंचाई। बेशक वे एक अच्छे सामाजिक कार्यकर्ता हैं और इस नाते उनका सम्मान भी किया जाता है। लेकिन इस कारण उन्हें किसी की भी भावना से खिलवाड़ करने का अधिकार तो कदापि नहीं मिल जाता है। उन जैसी शख्सियत को यह शोभा भी नहीं देता है। उनकी तीखी आलोचना बेवजह नहीं है। उन्हें बोलने से पहले अपनी बात को तोल लेना चाहिए।
मंगलवार, 24 मई 2011
अधिग्रहण उपजाऊ जमीन का नहीं बेकार की जमीन का हो
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हूडा ने उत्तर प्रदेश के किसानों को उनकी अधिग्रहीत भूमि का उचित मुआवजा न देने के कारण पिछले दिनों वहां की सरकार को काफी खरी खोटी सुनाई थी। अब उसी तरह के आन्दोलन पर चल रहे हरियाणा के अम्बाला व सोनीपत तथा सिरसा जिलों के लोगों ने संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। सरकार की ओर से उनसे किस तरह से निपटा जाता है यह तो वक्त ही बता पाएगा, लेकिन औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत की कहावत को चरितार्थ करते हुए इस किसान पुत्र ने क्या अबतक यह भी नहीं तय किया था कि अधिग्रहीत उपजाऊ जमीन का मुआवजा भी तो भरपूर दिया जाना चाहिए था। उद्योगों के लिए जमीन के अधिग्रहण को सही बताने वाले मुख्यमंत्री को यह तो पता होगा ही कि उपजाऊ जमीन पर उद्योग स्थापित करके वे राज्य को दोहरा नुकसान पहुँचाने पर क्यों तुले हैं। यह सही है कि उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की जान होते हैं; लेकिन इनके लिए बंजर पडी जमीन की ओर भी तो ध्यान दिया जा सकता है।। इससे बेकार पडी जमीन का उपयोग भी हो जाएगा और उपजाऊ जमीन पर पेट भरने के लिए अन्न भी मिलता रहेगा। उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण करके क्या सरकार अंडे खाने को बढ़ावा देना चाहती है? अथवा बढ़ती जनसंख्या के उदर को भरने का कुछ और विकल्प ढूंढ लिया है तो उसे स्पष्ट करे।
सोमवार, 23 मई 2011
गिरता भूजल स्तर और सम्बंधित समस्याएँ
आजकल पानी की कमी चाहे उतनी गंभीर नहीं है जितनी कि भयावह यह हो सकती है, लेकिन उस ओर हम तेजी से बढते जा रहे हैं। यदि समय रहते हम नहीं संभले तो उस भयावह स्थिति के आने में देर नहीं। धरती के अन्दर के पानी के अनाप-शनाप दोहन के कारण भूजल का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है और कई नलकूप व हाथ के नलके सूख गए हैं। आजकल सबमर्सीबल पम्पों के प्रचलन ने पानी के व्यर्थ बहने की मात्रा कई गुना बढ़ा दी है। विश्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन व पानी के अंधाधुंध दोहन के चलते अगले दशक में भारत के ६०% ब्लाक सूखे की चपेट में होंगे और तब फसलों की सिंचाई की बात तो भूल जाईए पीने के लिए भी पानी की मारामारी शुरू हो जाएगी। इस समय भी देश के ५७२३ ब्लोकों में से १८२० ब्लोकों में जलस्तर खतरनाक हदें पर कर चुका है। इस समस्या पर तुरंत ध्यान देकर इसके निराकरण की जरुरत है।
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