रविवार, 18 मार्च 2012

मानव तेरी दुनिया में
मानव तेरी दुनिया में
यह क्या हो रहा है ;
एक ओर जलते भवन
बिकते जिस्म
दूसरी ओर राजनीति
जले घरों की राख पर
मरे जनों की लाश पर
एक तरफ भूख गरीबी
बहुमत  में बदनसीबी
दूसरी तरफ विकास का ढिंढोरा
लगता है दिखावा कोरा
यहाँ भूख मिटाने को रोटी नहीं
नंगा तन ढकने को धोती नहीं
वहां खाने बहुत पर भूख नहीं
कपडे बहुत पर उनमें सलूक नहीं
कहीं प्रतिभा  दम तोड़ रही

जवानियाँ बम फोड़ रहीं
कहीं खरीदी जा रही डिग्री
धन के आगे मानवता हिली
दंगे कहीं हो रहे धर्म के नाम पर
कर्णभेदी शोर है कर्म के नाम पर
कहीं धर्म की मर्यादा तोड़ते धर्मी
मिलें कुकर्मों में लिप्त शोरकर्मी
काम क्रोध लोभ मोह
त्यागने का उपदेश दे जो
इन्हीं विकारों में लिप्त वो
करें व्यर्थ उसी उपदेश को
मानवता की बात वो कर रहे
धर्मनिरपेक्षता  का दम भर रहे
बाँट इंसानों को आज वो डटे हैं
दंगाइयों के सरताज जो बने हैं
किस किस को क्या क्या कहें
बेहतर है इतने में ही चुप रहें
हो चुकी जहाँ लाइलाज बीमारी है
वहां चुप रहना मजबूरी हमारी है
लेकिन मानव तेरी दुनिया की
ये हालत देखकर हताश हूँ
फिर भी तेरी असीम शक्ति को
जानते हुए मैं नहीं निराश हूँ. 

-ईश्वर   भरद्वाज



बुधवार, 11 जनवरी 2012

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

jindagee jeekar dekhen

जीवन में अनेक अवसर ऐसे आते हैं जब व्यक्ति को अपने जीवन के आचार  व्यवहार को नजदीक से देखने का अवसर मिलता है और वह कईबार विचलित होकर तथा अनेक बार घबराकर अपने को असहाय व निरीह सा अनुभव  करने लगता है. यह सही नहीं है.  इस बात से कतई इंकार नहीं  किया जा सकता कि जिन्दगी में समरूपता किसी को भी नहीं मिली है और न ही मिलने की कोई उम्मीद ही रखनी चाहिए . जिन्दगी फूलों की नहीं काँटों की सेज मानकर चलने से हम आने वाली चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार कर लेते हैं और उनपर प्राय: विजय पा लेते हैं. जिन्दगी से हमें ढेरों शिकायतें हो सकती हैं लेकिन जिन्दगी से ही हमें हर खुशी भी मिलती हैं, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. हम माँ- बाप से ढेर सारा प्यार पाते हैं और साथ ही डांट डपट भी खाते हैं. फिर भी हम उनसे सारी जिन्दगी जुड़े रहते हैं. हाँ ,  यहाँ कुछेक अपवादों की बात नहीं कह रहा . जिन्दगी को जीना सीख गए तो जिन्दगी स्वर्ग से भी बढ़कर हो जाती है. क्यों न हम इस और ध्यान दें और अच्छी सोच  के साथ जिन्दगी को भरपूर जीयें. मैं शब्द से निकलकर हम में मिल जाएँ तो जिन्दगी जीने का मज़ा सहज ही आ जाएगा. जरूर आजमाइए इसे.
*ईश्वर चन्द्र भारद्वाज  

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

doharaa charitra

यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि मनुष्य अपने लबादे में अनेक कुकृत्य करता है और उनका भंडाफोड़ होने से डरता है. इसके साथ-साथ वह दूसरों की बेइज्जति  करने का कोइ मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहता है. यह भरी विरोधाभास सभी जगह सभी जाति व समुदायों में सामान रूप से पाया जाता है. सब इस बात को बुरा बताते भी हैं और ऐसा करने वालों को अच्छा नहीं मानते हैं. फिर भी यह बदस्तूर जारी है. इसे दोहरे चरित्र का सबूत नहीं तो फिर क्या कहा जाएगा? 

रविवार, 18 सितंबर 2011

enjoy what u feel enjoying

हम न तो किसी को अपने से ज्यादा समझदार समझते हैं और न ही किसी को अपनी समझदारी में साझा करने देते हैं. किन्तु दूसरे समझदारों को हेय दृष्टि से देखन और उनकी समझदारी में हर वक्त साझेदारी करने तथा उस साझेदारी के बहाने उसे अपनी ही समझदारी मान लेने की एवं तदनुसार प्रचार व् प्रसार करने की अपनी कीय्त के कारन हम अनेक बार असमंजस की स्थिति में फंस जाते हैं. इस तरह हम न तो अपनी ही समझदारी को पूरी तरह विकसित होने देते हैं और न ही इसमें सुधार करने का ही प्रयास करते हैं.राजनीती में तो यह वायुरोग कुछ ज्यादा ही फैला हुआ है. एक से बढाकर एक धुरंधर भरे पड़े हैं और हर धुरंधर दूसरे को दिमागी रूप से दिवालिया घोषित करने में कोइ कसर नहीं छोड़ता है. कुल मिलकर इस हमाम में सभी नंगे हैं और दूसरे को शेम शेम कहे जा रहे हैं.मैं इस दौड़ में कई बार शामिल हुआ हूँ और अक्सर पिछड़  कर खड़ा देखता रहा हूँ. सच पूछो तो यों खड़ा होकर देखने में ज्यादा मजा आता है . इसीलिए अब तमाशा बनने की बजाय तमाशा देखने में ही जी लग गया है. - ईश्वर चन्द्र भारद्वाज    

शनिवार, 20 अगस्त 2011

they are what they don't seem

it has become a fashion among the politicians to give statements and comments on every issue whether they are concerned with it or not. they issue statements even if they have no knowledge of it or vice verse. it seems they have some kind of unknown fear from all and sundry. even they are afraid of their close ones. they are suspicious, they have fear. due to their dubious character and uncertain future, they are always suspicious and afraid.

बुधवार, 17 अगस्त 2011

the govt.,the congress versus anna hajare

i have come across many a news in which govt. of india as well as ruling congress party's spoke persons speaking in front of media keeping all the etiquetts away. even in the parliament the minister for parliamentary affairs tried his worst to block the smooth working of the parliament. the minister of hrd is badly known for his unwanted wording. a general secretary of the party is already known for his disputed language and issues where he has crossed all the boundaries of a democratic system. all htese are well versed in the field of law. many other spokepesons of this ruling party are foolowing the same path.anna hazare is working in the right direction foolowing the path adopted by gandhiji. one mr. tushar gandhi, a grandson of mahatma gandhi has also raised his word of disagreement with anna hajare, whom some persons has called as today's gandhi. everyone knows about the zigzag political career of him. he has nothing to do with gandhism. for some time he remains in the news only due to his comments on the things happening , out of which he choose only what he finds suitable. after this he again goes to a hide for a long period.